अदब की महफ़िल में देशभर के नामचीन कवि-शायरों ने बांधा समां, तीन घंटे तक लाभमंडपम में गूंजती रही तालियां और ‘वाह-वाह’

अदब की महफ़िल में देशभर के नामचीन कवि-शायरों ने बांधा समां, तीन घंटे तक लाभमंडपम में गूंजती रही तालियां और ‘वाह-वाह’
जश्न-ए-सालगिरह’ कवि सम्मेलन मुशायरे में अदब, शायरी और कविता का यादगार संगम

इंदौर/ देवास ( मोहन वर्मा ) । शहर की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले प्रतिष्ठित संस्था ‘अदब की महफ़िल’ कार्यक्रम जश्न -ए- सालगिरह में शनिवार की शाम शब्दों, संवेदनाओं और सरोकारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के नामचीन कवियों और शायरों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि लगभग तीन घंटे तक सभागार तालियों और “वाह-वाह” की गूंज से सराबोर रहा। देशभक्ति, प्रेम, प्रकृति, सामाजिक सरोकार, मानवीय रिश्तों और समकालीन विषयों पर प्रस्तुत रचनाओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।


कवि सम्मेलन मुशायरे की शुरुआत रुचि गांधी की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। उन्होंने अपनी ग़ज़लों और नज़्मों के माध्यम से रिश्तों, संवेदनाओं और जीवन के कोमल पक्षों को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। उनके बाद मंच पर आए विष्णु विराट, जिन्होंने अपने ओज, व्यंग्य और प्रभावशाली काव्यपाठ से माहौल में नई ऊर्जा भर दी। उनके व्यंग्य बाणों पर श्रोताओं ने खूब ठहाके लगाए, वहीं ओजपूर्ण रचनाओं पर तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही।

इसके बाद अश्वनी मित्तल ने बदलते सामाजिक परिवेश, मानवीय मूल्यों और वर्तमान समय की विसंगतियों को अपनी रचनाओं में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।अमरदीप सिंह अमर ने पंजाब की मिट्टी की महक, देशप्रेम और इंसानी रिश्तों की गर्माहट को अपने कलाम में पिरोकर श्रोताओं का भरपूर स्नेह अर्जित किया।

हास्य और व्यंग्य के लोकप्रिय हस्ताक्षर डॉ. पॉपुलर मेरठी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा। वहीं अज़हर इक़बाल ने नई पीढ़ी की सोच, समकालीन जीवन और मोहब्बत के एहसास को अपनी शायरी में खूबसूरती से अभिव्यक्त किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

      इसके पश्चात महशर आफ़रीदी ने इश्क़, इंसानियत और सामाजिक रिश्तों की गहराई को अपने प्रभावशाली अशआर में पिरोया। मुशायरे का समापन वरिष्ठ कवि सत्यनारायण सत्तन की ओजपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुआ। उन्होंने राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत अपनी कविताओं से ऐसा वातावरण निर्मित किया कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कार्यक्रम के दौरान हर शायर की प्रस्तुति के बाद श्रोताओं ने खुलकर दाद दी। किसी ने प्रेम के एहसास को शब्द दिए तो किसी ने देश के प्रति समर्पण का संदेश दिया। प्रकृति, समाज, रिश्ते और वर्तमान समय की चुनौतियों पर आधारित रचनाओं ने लोगों को भावुक भी किया और सोचने के लिए भी प्रेरित किया। यही कारण रहा कि पूरे आयोजन में श्रोताओं का उत्साह अंतिम क्षण तक बना रहा।

अदब की महफ़िल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि इंदौर केवल स्वाद और संस्कृति का ही नहीं, बल्कि साहित्य और शायरी का भी सशक्त केंद्र है। इस आयोजन ने शहर के साहित्य प्रेमियों को एक ऐसा मंच दिया, जहां शब्दों ने दिलों को जोड़ा और संवेदनाओं ने नई उड़ान भरी।

शुरुआती दौर का संचालन हेमंत गट्टानी ने अपनी सहज, प्रभावशाली और गरिमामयी शैली में किया। अतिथियों, कवियों और शायरों का स्वागत राजेश गट्टानी एवं अदब की महफ़िल के संचालक मंडल ने किया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top