प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, देवास में 3-दिवसीय नेशनल केस राइटिंग वर्कशॉप का शुभारंभ

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प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, देवास में 3-दिवसीय नेशनल केस राइटिंग वर्कशॉप का शुभारंभ

देवास/मोहन वर्मा । प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, देवास में 26 नवंबर 2025 को तीन दिवसीय 16वीं नेशनल केस राइटिंग वर्कशॉप का विधिवत शुभारंभ किया गया। वर्कशॉप की शुरुआत सरस्वती वंदना ,दीप प्रज्ज्वलन  एवं वंदे मातरम् के साथ हुई । संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. आर. के. जैन ने गेस्ट ऑफ ऑनर प्रेस्टीज यूनिवर्सिटी, इंदौर के वाइस चांसलर प्रो. डॉ.केयूर पुरानी,उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा सभी प्रतिभागियों का स्वागत  करते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में केस स्टडी मेथडोलॉजी का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। जब विद्यार्थी वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों में जाकर प्रायोगिक अनुभव प्राप्त करते हैं, तब उनकी निर्णय क्षमता मजबूत होती है और प्रबंधन सिद्धांतों की समझ अधिक सुदृढ़ होती है।

निदेशक प्रो. डॉ. आर. के. जैन ने बताया कि इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक तथ्यों एवं उद्योगिक परिस्थितियों पर आधारित केसों का विकास करना है, जिससे विद्यार्थी भविष्य के व्यावसायिक दायित्वों का पूर्वानुभव प्राप्त कर सकें। उन्होंने केस स्टडी की महत्ता, संरचना और उसकी प्रक्रिया पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस वर्कशॉप के गेस्ट ऑफ ऑनर एवं की-नोट स्पीकर, प्रेस्टीज यूनिवर्सिटी इंदौर के वाइस चांसलर तथा आइआईएम के प्रतिष्ठित फैकल्टी प्रो. डॉ. केयूर पुरानी थे। उन्होंने  बताया कि केस स्टडी क्या होती है, इसे कैसे विकसित किया जाता है तथा यह शैक्षणिक क्षेत्र में कितनी उपयोगी है। उन्होंने कहा कि सामान्यतः भारत में अपने स्वयं के केस विकसित करने की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत कम है और शिक्षण संस्थान प्रायः हार्वर्ड तथा यूरोपियन केस क्लियरिंग हाउस के विदेशी केसों का उपयोग करते हैं। उन्होंने प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, देवास द्वारा की गई यह पहल न केवल सीखने के अवसर प्रदान करती हैं, बल्कि प्रतिभागियों को स्वयं केस लिखने हेतु भी प्रेरित करती  हैं, जिसका शैक्षणिक जगत पर अत्यंत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रो. डॉ. केयूर पुरानी ने आगे कहा कि एक उत्कृष्ट केस तैयार करने के लिए अनेक तत्वों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है जैसे समस्या एवं प्रमुख पात्र की पहचान, डेटा संग्रह, तथा स्पष्ट लर्निंग ऑब्जेक्टिव निर्धारित करना। हमें अपने ज्ञान को केस के रूप में लिखकर साझा करना चाहिए, जिससे उसका प्रभाव और अधिक सार्थक हो सके। उद्घाटन सत्र के पश्चात अकैडेमिशियन, रिसर्च स्कॉलर्स तथा विद्यार्थियों द्वारा मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठित औद्योगिक इकाइयों का विजिट किया जाएगा, जिन पर आगामी दिनों में केस स्टडी विकसित की जाएंगी। तैयार केसों को यूरोपियन केस क्लियरिंग हाउस में प्रकाशन हेतु भेजा जाएगा, जिससे देश-विदेश के विद्यार्थी, रिसर्च स्कॉलर्स और  एकैडेमिशियन इन केसों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर सकेंगे। वर्कशॉप के कोऑर्डिनेटर डॉ. अशुतोष व्यास ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। वर्कशॉप की को-कोऑर्डिनेटर रितिका शर्मा रहीं। कार्यक्रम का संचालन प्रियल करंदीकर द्वारा किया गया।

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