देवास में होली पर रंगोली परंपरा को बचाये रखने में लगे है कलाकार


देवास/ मोहन वर्मा । देवास में होली पर सड़क पर आकर्षक रंगोली बनाने की परम्परा रही है । एक समय में शहर के अनेक स्थानों पर स्थानीय कलाकारों द्वारा उकेरी रंगोली निहारने शहर उमड़ता था मगर अब लोगों की व्यस्तता कहें या प्रचार प्रसार का अभाव ये परंपरा भी दम तोड़ती नजर आ रही है ऐसे में भी रंगोली कलाकार मनोज पवार ने इस बार फिर आठ आकर्षक रंगोली बनाकर परंपरा को जीवित रखा है और बड़ी संख्या में शहरवासियों ने इन्हें निहारा ।
देवास धर्म,साहित्य,संगीत और कलाओं का एक जीवन्त शहर है । माँ चामुण्डा तुलजाभवानी के सिद्ध स्थान माता टेकरी पर सालभर देशभर से लाखों श्रद्धालू अपनी मुरादें लेकर आते है तो नाथ संप्रदाय के शीलनाथ महाराज की धुनी का अपना एक विशिष्ट स्थान है । साहित्य में नवगीतकार नईम,स्व प्रभु जोशी,जीवन सिंह ठाकुर से लेकर डॉ प्रकाश कांत ने शहर को एक पहचान दी है । संगीत में पण्डित कुमार गंधर्व के नाम से देवास को देश-विदेश मे पहचाना जाता है तो कला में श्री अफजल से लेकर कई नामचीन चित्रकारों कलाकारों ने इन कलाओं को जीवन्त रखा है ।
यों तो रंगोली की परम्परा दीवाली का एक खास हिस्सा होता है मगर देवास में होली पर सड़कों पर रंगोली बनाने का सिलसिला बहुत पुराना है । बदलते समय के साथ भागते दौड़ते लोगों के पास जबकि कलाओं के लिये समय कम से कम होता जा रहा है,जीवन को उत्साह उमंग से भरने इन कलाओं को शिद्दत से जीवन्त बनाये रखने में अब भी कलाकार जुनून से लगे हैं ।
होली पर सड़कों पर रंगोली बनाकर इस परंपरा को जीवित रखने वाले कलाकार मनोज पवार ने इस बार फिर भगतसिंह क्लब के बैनर तले शालिनी रोड पर विविध विषयों पर आठ चित्ताकर्षक रंगोली बनाई जिन्हें दो दिनों तक शहरवासी निहारते रहे और एक बार फिर शहर की इस परम्परा के साक्षी बने ।
इस वर्ष मनोज पवार ने धार्मिक/सामाजिक/प्राकृतिक विषयों को चुना है, जो कि इस प्रकार से है- भारतीय सौन्दर्य (युवती), हिरण के बच्चे को दुलारती विश्नोई समाज की महिला, प्रभु श्रीराम जी की आराधना में लीन हनुमान जी, क्रोधित मॉ काली, शंकर भगवान पार्वती को महावर लगाते हुए, दृश्य चित्र, अमराई एवं भारतीय सीनेमा के हि-मैन धर्मेन्द्र की कलात्मक रांगोली बनाकर परंपरा को जीवित रखा है ।

