अमलतास सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मिली नई जिंदगी: 30 वर्षीय महिला ने गंभीर बीमारी को हराया

देवास (म.प्र.)- जीवन में कभी-कभी ऐसी कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, जहाँ उम्मीद की एक किरण ही सबसे बड़ा सहारा बन जाती है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहाँ 30 वर्षीय महिला ‘ताजो बी’ ने एक गंभीर बीमारी एकेलेसिआ कार्डिया से जंग जीतकर नई जिंदगी की शुरुआत की।
ताजो बी पिछले 3 वर्ष से भोजन निगलने में कठिनाई, उल्टी और कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह इलाज कराने में असमर्थ थीं। धीरे-धीरे उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि सामान्य जीवन जीना भी मुश्किल हो गया।
ऐसे कठिन समय में उन्हें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) का सहारा मिला। इस योजना के तहत उनका इलाज अमलतास सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पूरी तरह नि:शुल्क किया गया।
अस्पताल में वरिष्ठ सर्जन डॉ. उमेश जेठवानी (एमएस, एमसीएच , लैप्रोस्कोपिक एवं कैंसर सर्जरी विशेषज्ञ) के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम मेडिकल ओन्कोलोजी डॉ. हेमंत मित्तल डॉ. निखिल चौधरी ,डॉ. शफक , डॉ. शुभम एनेस्थीसिया डॉ. प्रेमकृषण ने उनकी स्थिति का गहन परीक्षण किया। इसके बाद लैप्रोस्कोपिक कार्डियोमायोटॉमी एवं फंडोप्लिकेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यह एक जटिल लेकिन अत्याधुनिक प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को न्यूनतम दर्द और जल्दी रिकवरी मिलती है।
ऑपरेशन के बाद ताजो बी की हालत में तेजी से सुधार हुआ। अब वह बिना किसी परेशानी के भोजन कर पा रही हैं और उनके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है।
मरीज द्वारा बताया गया की “मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे इतना अच्छा इलाज मुफ्त में मिलेगा। डॉक्टरों ने मुझे नया जीवन दिया है। आज मैं फिर से सामान्य जिंदगी जी पा रही हूँ।”
डॉ. उमेश जेठवानी ने बताया कि समय पर इलाज मिलने से यह गंभीर बीमारी पूरी तरह ठीक की जा सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी को लंबे समय तक निगलने में परेशानी हो, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
अमलतास सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के चेयरमैन श्री मयंक राज सिंह भदौरिया जी द्वारा बताया गया की यह मामला न केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी योजनाएँ सही समय पर जरूरतमंदों के लिए जीवनदायी साबित हो सकती हैं। ताजो बी की कहानी उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण है, जो आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं।

