संस्कृति विभाग भूला पंडित कुमार गंधर्व को

देवास/मोहन वर्मा । देवास को विश्व भर मे एक विशिष्ठ पहचान दिलाने वाले मूर्धन्य शास्त्रीय गायक पंडित कुमार गंधर्व का आज 08 अप्रैल को जन्मदिन हैं ।
कुमारजी के सन 1992 में देहावसान के बाद मध्यप्रदेश शासन के उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत अकादमी ने कुमारजी के सम्मान में कुमारजी के नाम प्रतिवर्ष युवा शास्त्रीय गायन/वादन के क्षेत्र में एक पुरस्कार की घोषणा करते हुए एक समारोह देवास में 08-09 अप्रैल को करने की शुरुवात की जिसमें चयनित कलाकार को प्रशस्ति पत्र और 51 हजार रुपयों की राशि दी जाती रही है । विगत 31- 32 वर्षों से निरंतर जारी ये सम्मान/आयोजन देवास शहर के लिये कुमारजी की स्मृति में एक अभिनव आयोजन हुआ करता था मगर इस बार ऐसा न जाने क्या हुआ कि अकादमी ने ये आयोजन नहीँ किया ।

कुमार गंधर्व प्रतिष्ठान की और से कुमारजी की सुशिष्या और सुपुत्री सुश्री कलापिनी ने समय पूर्व अकादमी के जिम्मेदारों से सम्पर्क भी किया मगर आयोजन को लेकर कोई सकारात्मक ज़वाब नहीँ आया । कहा गया कि आगे करेंगे..यहां ये बात महत्तवपूर्ण है कि 08 अप्रैल बाबा के जन्मदिन का क्या..? यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष 24-25 में कुमारजी की जन्मशती के अवसर पर देवास में एक बड़े आयोजन में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव खुद उपस्थित रहे थे ।
08 अप्रैल 24 को बेलगाम कर्नाटक में जन्में कुमार जी अपनी असाध्य बीमारी के चलते स्वास्थ्य लाभ के लिये मालवा की आबो हवा और खासकर देवास आ बसे थे और ताउम्र संगीत साधना करते हुए अपनी कर्मस्थली देवास में ही उन्होंने 12 जनवरी 92 को अपनी अन्तिम साँस ली ।
कुमार जी को अपने उत्कृष्ठ सांगीतिक अवदान के लिए भारत सरकार द्वारा 1977 में पद्मभूषण और सन 1990 में पद्मविभूषण के सम्मान से सम्मानित किया गया । कुमारजी को देश के गरिमामयी सम्मान संगीत नाटक अकादमी से भी विभूषित किया गया ।
प्रतिष्ठित कुमार गंधर्व सम्मान और प्रतिभाशाली युवा गायक,गायिकाऔ/वादको को दिये जाने वाले इस पुरस्कार को इस बार क्यों भुला दिया गया समझ से परे है? क्या संस्कृति विभाग कुमारजी के प्रशंसकों और देवास वासियों को इसका ज़वाब देगा..??


