देवास के एकमात्र सभागार की बदहाली कब दूर होगी..नया सभागार भी बेहद जरूरी…

(मोहन वर्मा-देवास)
देवास । कला नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले देवास शहर में कला की विविध धाराएं बहती है । संगीत हो या साहित्य,चित्रकला हो या रंगोली,नृत्य हो या गायन वादन,देवास ने न सिर्फ शीर्ष कलाकार दिए है बल्कि देश भर के शीर्ष कलाकार यहाँ अपनी प्रस्तुति देने आते रहे हैं। इन प्रस्तुतियों की बात करें तो शहर में तत्कालीन जूनियर नरेश मल्हार राव पवार के समय का बना एकमात्र सभागार/ऑडिटोरियम मल्हार स्मृति मंदिर ही कला प्रेमियों का सहारा है
नगर निगम द्वारा संचालित इस सभागार का उपयोग न सिर्फ कला से संबंधित साँस्कृतिक कार्यक्रमों के लिये किया जाता है बल्कि शासकीय कार्यक्रमों के साथ साथ भीड़ भरे अन्य आयोजन भी समय समय पर यहाँ आयोजित होते रहते है ।
इन दिनों ये सभागार बेहद बदहाल स्थिति में है । मुख्य द्वार पर प्रवेश करते ही उखड़ा बदहाल प्रवेश, मंच पर उबड खाबड़ दीवार(जो कार्यक्रमों के दौरान) पर्दों से ढंकी होती है,मंच के मुहाने के ऊपर की टूटती छत,यहाँ वहाँ की दम तोड़ती रोशनी,वाश रूम की दुर्दशा,कलाकारों के तैयार होने वाले रूम में बंद पंखे, हाल के बदहाल खंबे,अपनी कहानी ख़ुद कहते है । ये सभागार जब किसी कार्यक्रम के लिए किराये पर आयोजकों को दिया जाता है तो नगर निगम की शर्त होती है कि एन वक़्त पर कोई सरकारी आयोजन आने पर प्राथमिकता निगम की होगी और अनुमति निरस्त कर दी जाती है ।
04 लाख से अधिक जनसंख्या वाले उस शहर में जिसकी पहचान कला नगरी की हो,संगीत, साहित्य, चित्रकला, रंगोली,गायन वादन,नृत्य और थियेटर के कलाकार समय समय पर अपनी प्रस्तुति देते हों एक बेहतर और सुसज्जित सभागार की मांग लंबे समय से कलाप्रेमी करते आए हैं । कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन आयुक्त विशाल सिंह चौहान की पहल पर इसका जीर्णोध्दार भी किया गया था मगर निरंतर देखरेख के अभाव में ये सभागार फिर से बदहाल हो रहा है।कहने को तो जवाहर चौक के पास विक्रम सभा भवन भी शहर में है मगर बदहाली के चलते वह भी किसी भी आयोजक की प्राथमिकता में वो नहीँ हैं ।
शहर में निरंतर होने वाली गतिविधियों के लिए एक नए सभागार की जरुरत भी कलाप्रेमियों द्वारा लगातार उठाई जाती रही है,जो शहर के बीच हो और सर्वसुविधायुक्त हो । आश्चर्य इस बात का है कि शहर में विकास की गंगा बहाने का दावा करने वाले सक्षम राजनेता-प्रशासनिक अधिकारियों के होते हुए भी न तो मल्हार स्मृति मंदिर सभागार की दशा सुधर रही है और न नए सभागार के लिए कोई हलचल नजर आ रही है..


